रविवार, 13 अगस्त 2017

तिरंगा

तिरँगा
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दुनियाँ का सरदार तिरंगा।
धरती का श्रृंगार तिरंगा।1
चाहे दुश्मन कोई आए
हरदम है तैयार तिरँगा!2
जोभी आया मुँह की खाया
लहराया हर बार तिरंगा!3
पाला न कभी बैर किसी से
यारों का है यार तिरंगा!4
जब भी आए बात आन पे
बन जाता खूँखार तिरंगा!5
जिसके खातिर झूले फाँसी
उन वीरों का प्यार तिरंगा!6
तोड़ गुलामी की जंजीरें
फूटी बन जलधार तिरंगा!7
त्याग तपस्या का है पोषक
सब धर्मों का सार तिरंगा!8
जब-जब भूला विश्व आचरण
सिखलाता व्यवहार तिरंगा!9
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मापनी : 22  22  22  22
काफ़िया : " आर "
रदीफ़ : " तिरंगा "

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सुनिल शर्मा नील

दुनिया का सरदार तिरंगा

दुनियाँ का सरदार तिरंगा।
सबका है सत्कार तिरंगा।1
चाहे दुश्मन कोई आए
हरदम है तैयार तिरँगा!2
जोभी आया मुँह की खाया
लहराया हर बार तिरंगा!3
पाला न कभी बैर किसी से
यारों का है यार तिरंगा!4
गर आ जाए बात आन की तो
बन जाता खूँखार तिरंगा!5
जिसके खातिर झूले फाँसी
उन वीरों का श्रृंगार तिरंगा!6
तोड़ गुलामी की जंजीरें
फूटी बन जलधार तिरंगा!7
त्याग तपस्या का है पोषक
सब धर्मों का सार तिरंगा!8
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सुनिल शर्मा नील

शनिवार, 12 अगस्त 2017

गोरखपुर कांड


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कितने आँगन से किलकारी के नातों को वे तोड़ गए
कितने आंखों से झरते आँसू के रिश्तों को वे जोड़ गए
तंत्र की लापरवाही व लाचारी ने कैसा ये नरसंहार किया
कितने माँ बाप के लिए सिसकती रातों को वे छोड़ गए!
                                                     -सुनिल शर्मा नील

गोरखपुर कांड पर मुक्तक


कितने आँगन से चिड़ियों के नातों को वे तोड़ गए
कितने आंखों से आँसू के रिश्तों को वे जोड़ गए
तंत्र की लापरवाही ने कैसा ये नरसंहार किया
कितने माँ के लिए सिसकती रातों को वे छोड़ गए!

शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

गैर तेरे दिल में पलता रहा बैर

गैर तेरे दिल में पलता रहा बैर
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न तिरँगा,न ही कभी वन्देमातरम को भाया उसने
ओढ़ संविधान का चोला गीत कट्टरपंथी गाया उसने
शोहरत मिली उसे हिंदुस्तान में हिमालय से ऊँची
पर अफसोस अपना वीभत्स चेहरा दिखाया उसने!

गद्दार था

न तिरँगा,न ही कभी वन्देमातरम को भाया उसने
संविधान का चोला ओढ़ गीत कट्टरपंथी गाया उसने
उसे शोहरत दी मेरे हिंदुस्तान ने हिमालय से ऊँची
अफसोस गद्दार था चेहरा गद्दारी का दिखाया उसने!

गुरुवार, 10 अगस्त 2017

सरदार तिरंगा

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दुनियां में सरदार तिरंगा ।
अपनों पर है भार तिरंगा ।
चाहे आए कोई दुश्मन
हरदम है तैयार तिरँगा!
जो भी आये मुँह की खाए
लहराया हर बार तिरंगा!
जिसकी खातिर चूमे फाँसी
उन वीरों का प्यार तिरंगा!
तोड़ गुलामी की जंजीरें
फूटी बन जलधार तिरंगा!
ऊँचें नीचे पथ पे चलकर
हुई है सत्तर पार तिरंगा
त्याग तपस्या का परिचायक
सब धर्मों का सार तिरंगा
दुनिया में है न्यारा सबसे
धरती का श्रृंगार तिरंगा!
नही किसी से लड़ता पहले
यारो का है यार तिरंगा
पर जब बात आन की हो तो
बन जाता खूंखार तिरंगा!
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मापनी : 22  22  22  22
काफ़िया : " आर "
रदीफ़ : " तिरंगा "

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सुनीलशर्मा नील

मंगलवार, 8 अगस्त 2017

बहन से वादा

बहन से वादा
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कड़ी ये प्यार की हरगिज ,नही मैं टूटने दूँगा
कभी भी एक पल तुझको ,नही मैं रूठने दूँगा
निभाऊंगा वचन बहना मैं अपने प्राण देकर भी
कभी राखी के बंधन को, नही मैं छूटने दूँगा!
                                   
                   सुनिल शर्मा नील

सोमवार, 7 अगस्त 2017


कड़ी ये प्यार की हरगिज नही मैं टूटने दूँगा
कभी भी एक पल तुझको नही मैं रूठने दूँगा
रहूँ  चाहे जहाँ भी मैं मुहब्बत कम नही होगी
कभी राखी के बंधन को नही मैं छूटने दूँगा!

साथ भाई बहन का


कड़ी ये प्यार की हम-तुम कभी न टूटने देंगे
कभी भी एक दूजे को नही हम रूठने देंगे
रहें चाहे जहाँ दोनों मुहब्बत कम नही होगी
साथ भाई बहन का हम कभी न छूटने देंगे!

साथ भाई बहन का


कड़ी ये प्यार की हम-तुम कभी न टूटने देंगे
कभी भी एक दूजे को नही हम रूठने देंगे
रहें चाहे जहाँ दोनों मुहब्बत कम नही होगी
साथ भाई बहन का हम कभी न छूटने देंगे!

रविवार, 6 अगस्त 2017

भारत के मुक्के ने

भारत के मुक्के ने चीन को निढाल कर दिया
बोलती बंद कर बड़बोले को बेहाल कर दिया
"डोकलाम" की ज़मी पे तेरी नापाक हरकतों ने
हिंदुस्तानियों की आंखों को अब लाल कर दिया!

शनिवार, 5 अगस्त 2017

भारत के मुक्के ने


भारत के मुक्के ने चीन को निढाल कर दिया
बोलती बंद कर बड़बोलो को बेहाल कर दिया
"डोकलाम"का गजब ट्रेलर दिखाकर विजेंदर ने
हिंदुस्तान की जनता को निहाल कर दिया!



तलवारों के दम

तलवारों के दम पर हमने कब किसको मजबूर किया !
गले लगाकर रखा सबको किसको खुद से दूर किया !
शांति के पक्षधर है हम, इसे न  समझे कमजोरी ,
वक़्त आने पर अच्छे अच्छों का घमंड पल में चूर किया।

गुरुवार, 3 अगस्त 2017

हम हिन्दू है-मुक्तक

नही तलवार के बल पर किसी को धर्म बदलने मजबूर किया है
सदा गले लगाया है सबको,नही किसी को स्वयं से दूर किया है
शांति के पक्षधर है पर इसे कभी हमारी कमजोरी न समझना
हम हिन्दू है हमने सैकड़ों सिकंदरों का गुरूर चूर किया है!

गुरुवार, 27 जुलाई 2017

बिखरता-सँवरता बिहार

बिखरता-संवरता बिहार
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बेमेल थी यह जोड़ी इसे तो टूटना ही था
      "हठबंधन"के इस गाँठ को तो छूटना ही था
भरोसे की ये पतंग तो,पहले ही गई थी कट
     कटी जो पतंग तो बीजेपी को लूटना ही था!

-सुनिल शर्मा"नील"

रविवार, 23 जुलाई 2017

हमसे बिछड़ के भी


हमसे बिछड़ के वे हमारे पास रहेंगे
बनके सदा मन में सुखद अहसास रहेंगे
कहता है कौन "बाबूजी" हमें छोड़ गए है
बनकर के प्रेरणा सदा वे साथ रहेंगे!

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

मेरे सुपुत्र देव

मेरे सुपुत्र देव.............

आज रश्मि रथ है पर कल अग्नि पथ होगें बेटा !
              तुझे  हराने को आतुर  अनगिनत रथ होगें बेटा !
भूल न जाना कभी तू ,पाठ अभिमन्यु की तरह
           संघर्ष मंत्र से ही सफल तुम्हारे मनोरथ होगें बेटा !!

पापा ( सुनिल शर्मा नील )

मजदूर

          """मजदूर""""""
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पसीने से नहाया धूल धूसरीत वह मजदूर
सूर्य भी जिसके आगे सर झुकाता है
सृष्टि का हर विकास जिसकी देन है
आखिर क्यों अभावग्रस्त जीवन बिताता है?

रोटी की जुगत में खून पसीना एक करते
कभी खानों,मिलों,स्टेशनों में नजर आता है
हाड़तोड़ श्रम कर दो जून की रोटी जुटाता है
श्रमवीर वह पग-पग पे क्यों शोषित किया
जाता है?
सृष्टि का हर विकास...................

विडंबना तो देखो संसार की,,,
स्कूल मजदूर बनाता है उसके बच्चे शिक्षा से
दूर है
होटल मजदूर बनाता है उसके बच्चे भोजन से
दूर है
अस्पताल मजदूर बनाता है उसके बच्चे ईलाज
से दूर है
दूसरों को महल देने वाला झोपड़ी में पैदा होकर झोपड़ी में मर जाता है!
सृष्टि का हर विकास............

क्यों न हम एक नया समाज बनाए
कोई शोषित न हो जहाँ सबको अधिकार दिलाए
ऊंच नीच का भेद भुलाकर सबको गले लगाए
धर्म मानवता का हमें यही पथ तो दिखलाता है!
सृष्टि का हर विकास...............
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रचनाकार-सुनिल शर्मा"नील"
              थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
               7828927284
                सर्वाधिकार सुरक्षित

बुधवार, 19 जुलाई 2017

लड़ता देखा कोई कोई


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रोते हैं सब लोग धरा पर,हंसता देखा
कोई कोई
सहते है सब लोग यहाँ पर,लड़ता देखा
कोई कोई
जिसने खुद का मतलब समझा,इतिहास
वही तो लिख पाया
कहते है सब लोग यहाँ पर,करता देखा
कोई कोई
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सुनिल शर्मा"नील"
7828927284

पाँखों वाला कोई कोई

भौतिकता में अंधे सारे,आँखों वाला है
कोई कोई
पंख कुतरते एक दूजे के,पाँखों वाला है
कोई-कोई
ठूठ बचें है केवल अब तो वृक्ष नही तुम
पाओगे
मानवता के इस कानन में शाखों वाला है
कोई कोई

गुरुवार, 13 जुलाई 2017

हम उनकी लाशों पर भी


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सवा अरब की आबादी को वो लात लगाकर चले गए
घर घुसके आतंकी हमको औकात दिखाकर चले गए
हम उनकी लाशों को भी जन्नत की मिट्टी देते है
वो अमरनाथ यात्रा पर भी उत्पात मचाकर चले गए!
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वो भोले के भक्तों पर ही उत्पात मचाकर
चले गए




खुद के रक्षक बनना


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भक्षकों के लिए भक्षक बनना सीखो
तक्षकों के लिए तक्षक बनना सीखो
औरों पर इतनी निर्भरता ठीक नही
जीना है तो खुद रक्षक बनना सीखो!
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भूल गया है आदमी
*******************************   "सोना" पाकर सोना भूल गया है आदमी
फसल "प्रेम" की बोना भूल गया है आदमी
स्वार्थ की दौड़ में पीछे छूँट गया सबकुछ
गम में औरों के रोना भूल गया है आदमी!
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सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
सर्वाधिकार सुरक्षित

बुधवार, 12 जुलाई 2017

वो भोलेभक्तों का

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सवा अरब की आबादी को लात
दिखाकर जाते है
घर घुसके आतंकी हमको औकात
दिखाकर जाते है
हम उनके लाशों को भी इज्जत
की मिट्टी देते है
वो भोलेभक्तों का हमको रक्तपात
दिखाकर जाते है!
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रविवार, 9 जुलाई 2017

भूल गया है आदमी
*******************************   "सोना" पाकर सोना भूल गया है आदमी
फसल "प्रेम" की बोना भूल गया है आदमी
स्वार्थ की दौड़ में पीछे छूँट गया सबकुछ
गम में औरों के रोना भूल गया है आदमी!
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सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
सर्वाधिकार सुरक्षित

शुक्रवार, 16 जून 2017

मेरे राह के

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मेरे लिए खुशियाँ बुनने वाले
मेरे लिए डांट सुनने वाले
ईश्वर आपको सदा खुश रखें
मेरे राह के कांटे चुनने वाले!
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मंगलवार, 13 जून 2017

जिसे खुदमें डूबने का तरीका
आ गया
समझो उसे जिंदगी जीने का सलीका आ गया

सोमवार, 12 जून 2017

सब कुछ पास होकर भी एक कमी है
वो खुशी ही क्या जिस्मेंआँखों में नमी है
-सुनिल शर्मा"नील"

रविवार, 11 जून 2017

मुक्तक

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हर आगाज का अंजाम तय है
हर सफर का मुकाम तय है
खामोशी से मेहनत करते हो
श्रम को सफलता का जाम तय है!
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रविवार, 28 मई 2017

गौ काट रहे हो

केरल में राजनीतिक अंधों द्वारा सरेआम गौ माता को काटकर बीफ पार्टी मनाने वाले विधर्मियों पर आक्रोश की पंक्तियाँ,,,,,,,

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ये कैसा विरोध जिसमें समाज बाँट रहे हो
देशधर्म भूल पार्टी के तलुवें चाट रहे हो
ये जानकर भी वह माँ,हम उसके बेटे है
राजनीतिक चिढ़ में तुम"गौ"काट रहे हो!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284,28/5/2017
Cr

                         

मंगलवार, 23 मई 2017

मानवता की परिभाषा ढूँढ़ रहा हूँ

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निराशा के गगन में एक आशा ढूँढ़ता हूँ मैं
नफरतों के चम में एक दिलासा ढूँढ़ता हूँ मैं
सिखाया था बुजुर्गों ने बड़े ही प्यार से जिसको
वो विस्मृत प्रेम की भाषा यहाँपर ढूँढ़ता हूँ मैं !
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रविवार, 21 मई 2017

एक पिता से उसका

एक पिता से उसका,,,,,,
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अधरों से मुस्कान छीन ली उसकी है ।
दिल में जो अरमान छीन ली उसकी है ।
स्वार्थसिद्धि में आज किसी कैकई ने
दसरथ से संतान छीन ली उसकी  है ।
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एक पिता से उसका

एक पिता से उसका,,,,,,
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अधरों से उसका मुस्कान छीना है
पौधे से उसका बागबान छीना है
स्वार्थसिद्धि में फिर किसी कैकई ने
एक पिता से उसका संतान छीना है!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284

बुधवार, 17 मई 2017

मैं शिव तो शक्ति

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मैं शिव तो शक्ति तुम हो
मैं साधना तो भक्ति तुम हो
मैं काव्य तो सार तुम हो
मैं वीणा तो तार तुम हो
मैं गीत तो राग तुम हो
मैं जीवन तो अनुराग तुम हो
मैं बसन्त तो बहार तुम हो
मैं सावन तो फुहार तुम हो
मैं सुगंध तो चंदन तुम हो
मैं हृदय तो स्पंदन तुम हो
मैं दीया तो ज्योत तुम हो
मैं नदी तो स्रोत तुम हो
मैं वाणी तो मिठास तुम हो
मैं प्यासा तो प्यास तुम हो.......
*******************************
बस अंत में यही कहना है प्रिये तुमसे
ही मैं हूँ, मेरे होने का अर्थ है तू नही तो सब व्यर्थ है,,,,,

मंगलवार, 9 मई 2017

बन सका कंचन

पहिनने वालों ने उसकी तपन शायद नहीं देखी ।
चमक देखी छिपी उसमें जलन शायद नहीं देखी ।
अँगारों को सहा जिसने वही बस बन सका कंचन ।
जमाने ने अंगीठी की अगन शायद नही देखी!

सोमवार, 8 मई 2017

फिर उड़ न पाया

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इतना टूटा कि फिर जुड़
न पाया
उन गलियों की ओर मुड़
न पाया
जिनसे हौसला था भरोसा
उसी ने तोड़ा
गिरा इस तरह पँछी की फिर
उड़ न पाया
********************
सुनिल शर्मा"नील"
ओजकवि,थानखम्हरिया,(छ. ग.)

लोभ बन गया धर्म

मानवता लज्जित यहाँ,सबके गंदे कर्म
पानी आंखों का मरा,लोभ बन गया धर्म

रविवार, 7 मई 2017

तब जाकर कंचन कहाया है,,,,


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जमाने वालों ने उसका तपन
नही देखा
चमक के पीछे छुपा जलन
नही देखा
अंगारों को सहा तब जाकर
कंचन कहाया है
लोगों ने दुश्वारियों भरा उसका
जीवन नही देखा!
*******************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
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शुक्रवार, 5 मई 2017

मुक्तक हेतु

मुक्तक मे ध्यातव्य बातें
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१- मुक्तक में चार चरण होते हैं।
२- पहले चरण में जितनी मात्रा हों बाकी ३ में भी उतनी ही रहें।
३- चारो चरण समान लय में हों।
४- तुक मात्रा से न लेकर वर्ण ( अक्षर) से ली जाय।
५- तुक में आए शब्द का दोहराव न हो।
६- तुक वाले शब्द का अंतिम वर्ण न बदले। वर्ण से पूर्व के स्वर का भी खयाल रखा जाय।
७- पूरे मुक्तक का भाव पक्ष एक ही रहे।
८- रदीफ ( मतला यानी पहले २ चरण के अंतिम जो शब्द समान हों) चौथे चरण में वही रहे जो मतले में है।
चेतनानंद

गुरुवार, 4 मई 2017

मगर दिल फिर भी मिलते है

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जमाने में मुहब्बत से,सदा ही लोग
जलते है
किया करते मुहब्बत जो,सदा शोलों
पे चलते है
मगर ये है हवा जिसको,कहाँ कोई बाँध 
पाया है
दिलों में है बहुत पहरे,मगर दिल फिर भी
मिलते है
*******************************
सुनील शर्मा"नील"
थान खम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284

सोमवार, 1 मई 2017

मैं वही मजदूर हूँ

मैं वही मजदूर हूँ,,,,,,
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जमाने को उजाला देकर खुद
बेनूर हूँ
विकास का जनक विकास
से दूर हूँ
भूलाया गया महलों से जिस
नीव का योगदान
दूसरे के सपनों का सर्जक मैं
वही मजदूर हूँ!
************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
1/05/2017
CR



बुधवार, 19 अप्रैल 2017

भारती निराश

अपना वजूद जो स्वंय जानते हैं नहीं
अपने से छोटा मानते हैं आसमान को
भारती निराश आज लाड़लों का हश्र देख
सेना से ही राजनेता माँगते प्रमान को
हाथ में बँदूक पर हाथ बँधे सैनिकों के
लगता बदलना पड़ेगा संविधान  को
मारा जा रहा है थप्पड़ों से सैनिकों को हम
मौन हैं क्या हो गया है देश के प्रधान को

मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

भारतीय सेना के सैनिकों को पत्थरबाजों के लात मारने पर दिल्ली से आह्वान करती एक रचना

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भारती निराश आज,लाडलों का हश्र देख
सेना के जवान यहाँ,लात-जूते खा रहे
हाथ है बन्दूक पर,तंत्र ने है बांधे हाथ
सिंह के सम्मुख देखो,श्वान गरिया रहे
देश आज चाहता है,खोया हुआ स्वाभिमान
दिल्ली दे आदेश लाखो,हाथ खुजला रहे
सूद संग होगा प्रतिकार,दुश्मनों से अब
जीते जी जलेंगे जो कि,पत्थर चला रहे!
********************************
गीत पाकी गा रहे

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

वंदेमातरम गाता हूँ,,,

क्षमा नहीं कर सकता हूँ मैं भाग लगाने वालों को ।
भारत माँ की पा्वनता पर दाग लगाने वालों को ।
मैं वाणी का वरद पुत्र हूँ वंदेमातरम गाता हूँ ।
जीवित ही दफना दूँगा इन आग लगाने वालों को ।

कलम नही रूक सकती है,,,,,

गरिमा मेरे स्वाभिमान की कभी नहीं चुक सकती है ।
नजर किसी के सन्मुख मेरी कभी नहीं झुक सकती है ।
जब तक अश्रू नहीं रुकेगें शोषित जन की आँखों के ।
तब तक मेरे इंकलाब की कलम नहीं रुक सकती है ।

शुक्रवार, 31 मार्च 2017

पायलिया,कंगन के

जब तक गूँज रहे भारत में स्वर करुणा के क्रंदन के ।
जब समारोह आयोजित आतंकी अभिनंदन के ।
जब तक सत्यम शिवम सुन्दरम के /पीड़ित हैं अनुयायी ।
तब तक कलम नहीं लिख सकती गीत पायलिया कंगन के ।

गुरुवार, 23 मार्च 2017

लिख दूँ कैसे तुम्ही

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जब तक गुंजित होते हो स्वर जनगणमन के
क्रंदन के
जब तक ज़िंदा है भारत में सुर आतंकी 
वन्दन के
सैनिक के जब गिरेबान तक हाथ कोई
लहराते हो
लिख दूँ कैसे तुम्ही बताओ गीत पायलिया,
कंगन के
********************************
कवि सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
रचना-23/03/2017
Copyright

मंगलवार, 21 मार्च 2017

जबसे तुमको,,,,

जबसे तुमको मेहरबान पा
लिया है
मानो परिन्दे ने आसमान पा
लिया है
सूखे अरमान हरे होने लगे
है
चमन ने अपना बागबान पा
लिया है

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

अक्षय कुमार के सुकमा के शहीदों को 1 करोड़ आठ लाख दान करने पर उन्हें नमन करती मेरी रचना,,,,,,,

रियल लाइफ हीरो अक्षय कुमार के सुकमा के शहीदों को 1 करोड़ 8 लाख देने पर उनकी देशभक्ति को नमन करती मेरी ताजा रचना................. रचनाकार-सुनिल शर्मा"नील" थान खम्हरिया(छत्तीसगढ़) 7828927284 ******************************** कोई सितारा "पीके" बन धर्मों का मान गिराता है कोई बलात्कार के पीड़ितों का उपहास उड़ाता है कोई कहता है स्वदेश में बीवी को भय लगता है कोई कहता गौ माँस खाने से ही जी भरता है पाक सितारों को लेकर कोई तरफदार बन जाता है कोई शहादत पर सैनिक के पी शराब मुस्काता है ऐसे में जब आधा बॉलीवुड कौरव दल लगता है "अक्षय "है जिसमें भारत को अपना अर्जुन दिखता है रील लाइफ के हीरों ने रियल में कर दिखलाया है सुकमा के पीड़ितों के दर्द को अपना दर्द बताया है खोल खजाना वीरों को जिसने अपना सम्मान दिया औरों ने तो सिर्फ भुनाया कौड़ी भी न दान किया नाज है तुमपे हमें खिलाड़ी सदियों तक तेरा मान रहे तुझको स्नेह मिले इतना कि सारे जग में शान रहे तेरे कर्मों से निश्चित आजाद,भगत हर्षित होंगे तेरे कर्मों से निश्चित लाखों इक दिन प्रेरित होंगे नील करे आह्वान युवा हीरो की हम की पहचान करे देश,धर्म की बात करे उनका ही हम सम्मान करें देखे फ़िल्में उनकी ही जो भारत माँ के लिए जीयें ना कि उनकी जो भारत के मर्यादा पे होंठ सीए देशभक्ति के गंगा में सुनलो मिलकर बहना होगा भारत में रहना है तो वन्दे मातरम कहना होगा! ******************************** आप सब मित्रों से करबद्ध निवेदन है रचना को मूल रूप में बिना काट-छाँट के शेयर करें,,नाम काटकर किसी कवि के श्रम व सृजन का अपमान न करें,,,..जय हिंद

बुधवार, 15 मार्च 2017

डरना न आफरीन


यह तालिबान नहीं,मेरा हिंदुस्तान है
परिन्दों का सबसे प्यारा आसमान है
डरना न आफरीन फतवों से कभी तुम
उड़ते रहने से जग में तेरी  पहचान है|

रंग लेता हूँ

"रंग लेता हूँ खुद ही चेहरे को
गुलाल से
ये सोंचकर कोई मेरी तन्हाई
न पढ़ ले"

मंगलवार, 7 मार्च 2017

चाहूँ मै रंगना तुमसे ,,,,


-----------------------------
हाथों में है रंग सभी के,खुद को कहाँ
छुपाऊँ रे
चाहूँ रँगना तुमसे ही मैं ,किस किस को
समझाऊँ रे
रंग न जाए कोई दूजा,कान्हा अब तो
आ जाओ
भंग पिए सब रंग लगावत,कैसे बचकर
जाऊँ रे
----------------------------
सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)

                     

सोमवार, 6 मार्च 2017

क्यों होता गुमराह-दोहा

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ढूँढा करते है जिसे,इतउत लेकर चाह
रहता मन में ही कहीं,क्यों होता गुमराह!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284

नशा फोन का,,,,,,,

******************************
रावण रूप बदलकर वापस आया है
घर घर में अपनी माया फैलाया है
रिश्तें घायल है उसकी दानवता से
सबके ऊपर नशा फोन का छाया है|
******************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
06/03/2017
CR

रविवार, 5 मार्च 2017

रावण नाम बदलकर

बचपन घायल है
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रावण नाम बदलकर वापस आया है
घुसकर रिश्तों में एकाकी लाया है
बचपन घायल है उसके दानवता से
संबंधों में तीखा जहर मिलाया है
********************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
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06/03/२017

बुधवार, 1 मार्च 2017

देशद्रोह के

देशद्रोह के हर बार......
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खिलाड़ी वही है,मोहरें बदल जाते है
बारात वही है,सेहरे बदल जाते है
लगाने आग मेरे भारत के शान्ति में
देशद्रोह के हरबार चेहरे बदल जाते है!
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सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
CR
01/03/2017




मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

मुक्तक-इरादे

मुक्तक-इरादा
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जमाने की सुनकर घबराना नही
जो हुआ उसपे आँसू बहाना नही
इरादों से आधी जंग जीती जाती है
बिना लड़े कंधे कभी गिराना नही!
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सुनिल शर्मा नील
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ. ग.)
7828927284


इरादा

मुक्तक-इरादा
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जमाने की सुनकर घबराना नही
जो हुआ उसपे आँसू बहाना नही
इरादों हो तो आसमाँ भी झुकते है
चाहे जो हो कभी कंधे गिराना नही!
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सुनिल शर्मा नील
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ. ग.)
7828927284


आजाद

आजाद"
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तूफ़ान में आज़ादी का खेता रहा वो नाव,
चुन चुनके अंग्रेजो को भी देता रहा वो घाव।
छू न पाई कभी गुलामी उनको जीते जी
आज़ाद था मूछों पे ही देता रहा वो ताव।
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सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

आजाद


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तूफानों में आजादी की नाव खेता रहा
क्रांतिवीर फिरंगियों से लोहा लेता रहा
"आजाद"था गुलामी छू न पाई  जीते जी
जब तक जिया मूँछों पे ताव देता रहा |
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सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
CR

रविवार, 26 फ़रवरी 2017

बेटा बेटी एक है

बेटा-बेटी एक है,कब समझेंगे लोग
मन में अपने व्यर्थ का,पाले बैठे रोग!

बनके रहना तू "कमल"

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माना जमाने की हवा खराब है
यहाँ सबके चेहरों पे नकाब है
फिर भी बनके रहना तू "कमल"
उसके खाते में सबका हिसाब है|
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
CR

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

नाम महाकाल तेरा

नाम महाकाल तेरा,,,,,,,,,
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कालों के भी काल तुम,नाम महाकाल तेरा
सत्य तुम्ही,शिव तुम्ही,सुंदर कहाते हो
अंग में भभूति और,सर्पों का श्रृंगार किए
हिय राम नाम लिए,धुनि को रमाते हो
पापन के नाश हेतु,रूप हनुमान लेते
सीता माँ की सुध लेते,लंका को जलाते हो
संकट में होती सृष्टि,तब विषपान कर
भोले मेरे "नीलकंठ",तुम बन जाते हो!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
24/02/2017
CR

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

छत्तीसगढ़ म बेंचही सरकार ह दारु,,,,,

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राजा ह प्रजा के टोटा मसकत हे
नियाव के भीतिया कइसे भसकत हे
छत्तीसगढ़ म बेचही सरकार ह दारु
कोन सोझ रेंगय जब सियाने भटकत हे
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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

विष पीकर शंकर ,,,

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शब्दों को धरातल पर लाता क्यों नहीं
अपने हिस्से का दीया जलाता क्यों नहीं
बहुत आसाँ है उठाना दूसरों पे उंगली
विष पीकर शंकर बन जाता क्यों नही?
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छ. ग.)
7828927284

मत करो पागल

2122 2122 212
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मत करो घायल नजर के तीर से
मत करो पागल मुझे तुम पीर से
टूटता आया सदा हूँ इश्क में
मत भरो अब इन दृगों को नीर से
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अपने हिस्से का "दीया"

अपने हिस्से का दीया.......
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मानव होकर मानवता निभाता क्यों नही
किसी रोते हुए को कभी हँसाता क्यों नही
वैसे तो बड़ी शिकायते है जमाने से
अपने हिस्से का दीया खुद जलाता क्यों नही?
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
9755554470
रचना-14/02/2017

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

जिंदगी का साथ

2122 122,2122 122
टूटा चश्मा भी इनसे बनवाया नही जाता
खाना भरपेट दो वक्त का  खिलाया नही
सर दर्द हो गया है,अपने ही घर में रहना
जिंदगी का साथ अब निभाया नही जाता


सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

बसंत

              ""बसंत""
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अलसाई धरती में उमंग छाया है
ऋतुराज बसन्त वापस आया है
सर्दी सरक करके गायब हुई है
दिनकर के होठों लाली खिली है
धरती ने ओढ़ी पीली चुनर है
कलियों पे झूमे देखो भ्रमर है
आम के तरू बौरों से सजे है
कोयल कूंको से पी को भजे है
प्रीत की बयार चले चहुओर है
मिलन को आतुर पोर-पोर है
मौसम को कैसे खुमार आया है
पुष्पों के सुगंध ने चमन महकाया है
बागों में बहार नजर आने लगी है
तितलियाँ झुंडों में मंडराने लगी है
मोहल्ले में फाग के गीत सुनाते है
प्रेयसी को होली के दिन याद आते है
राधा भी लगाए है मिलन की आस
साँवरिया से मिलादे रे पावन मधुमास!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
CR
रचना-06/02/2017







गुलाम मशीनों का......


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मैदान सूना है कोई खेल दिखाई नही देता
पहले सा आपस में मेल दिखाई नही देता
गुलाम मशीनों का कुछ ऐसा बना मानव
ननिहालो के बालों में तेल दिखाई नही देता|
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
रचना-06/02/2017
CR

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

खुशी की "मातु"वह डाली

सुबह के सर्द मौसम में,लिये जब चाय की प्याली
जगाती है मुझे हरदम,बजाकर कान में ताली
दरश उनके करूँ जब भी,मुकम्मल तीर्थ होते है
दुआ के फूल बाँटे जो,खुशी की "मातु"वह डाली!

मंगलवार, 31 जनवरी 2017

क्योंकि मुहब्बत को मैं,,,

बस इसलिए उसका इन्तजार किया करता हूँ...
क्यूँकि मुहब्बत को मैं खुदा कहता हूँ.....
देर है उसके घर पर अंधेर नहीं करता.....
एक इसी आस में सजदे किया करता हूँ......

सुनिल शर्मा
देवांगन पारा,थान खमरिया
7828927284

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

कलम लोभ लिखे

"कलम पीड़ा नही लोभ लिखे"
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जब अखबारों में झूठ दिखे
कलम पीड़ा नही लोभ लिखे
लोकतंत्र को लगता "ग्रहण"है
अंधेरों को कभी जो सूरज बिके|
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सुनिल शर्मा "नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
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23/01/2017

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

रोशनी आज उसकी


चिलमन से कर इशारे,बेताब कर रही है
मेरी मुहब्बत मुझे ,आदाब कर रही है
चाँद  जल रहा है मेरे चाँद को देखकर
रोशनी आज उसका,महताब कर रही है

सोमवार, 16 जनवरी 2017

लौटना है राही को

लौटना है"राही"को......
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चंद टुकड़े कागज के पाकर
इतराता है आदमी
इसे पाने रिश्तों का लहू
बहाता है आदमी
ये जानकर लौटना है"राही"
को एक दिन
जाने क्यों "घर" सराय को
बताता है आदमी!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
78289272846
Copyright
16/01/2017

भूल जाता है राही


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चंद कागज को पाकर इतराता है
आदमी
इसे पाने अपनों का भी लहू बहाता
है आदमी
भूल जाता है "राही"घर लौटना है
सफर के बाद
जाने क्यों "सराय"को घर अपना
बताता है आदमी!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
Copyright
16/01/2017