सोमवार, 16 अप्रैल 2018

बात आन की हो तो लड़ना,,,,


बात आन की हो तो लड़ना जरूरी होता है
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जब कभी पाप सीमा पार करने लगे
झूठ रह रहकर सत्य पर वार करने लगे
ललकारने लगे आँख दिखा पौरुष को
तब रण में अर्जुन सा अड़ना जरूरी होता है
बात आन की हो तब लड़ना जरूरी होता है!

जब सम्बन्धो पर स्वार्थ भारी होने लगे
रिश्तों को जैसे कोई महामारी होने लगे
सीधापन को समझा जाने लगे नपुंसकता
तब अन्याय को तमाचा जड़ना जरूरी होता है
बात आन की हो तब लड़ना जरूरी होता है!

जब दुनिया लगी हो तुम्हे झुकाने को
छल आकुल हो अपना फन उठाने को
प्रतिभा को धन लगा हो दबाने में
तब बैरी के आंखों में गड़ना जरूरी होता है
बात जब आन की हो तो लड़ना जरूरी होता है!
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गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

रील लाइफ का दबंग


पर्दे की दुनिया में ऐसी पारी खेली कि गेल हो गया !
बाँकी रहे लोकल रेलगाड़ी,यह सीधे मेल हो गया!
रील लाइफ का "दबंग हीरो" रियल मे अपराधी निकला
खुले घूमते नकली टाइगर को आखिर जेल हो गया !!

बुधवार, 4 अप्रैल 2018

बचपन उजड़ जाते है

पानी या खाद कोई एक ज्यादा हो,तो पौधे सड़ जाते है
हवा जिंदगी है पर ज्यादा मिले तो ,जड़ से उखड़ जाते है
माँ बाप दोनों का प्यार निहायत ही ,जरूरी है बच्चों के लिए
किसी एक की कमी होने से बचपन ,अक्सर उजड़ जाते है !

गुरुवार, 29 मार्च 2018

कराया उपहास

किसी का ईंट,किसी का गारा चुराकर उसने
जोड़तोड़ की अपनी,कविता बनाकर उसने!
बटोरकर तालियाँ,दूसरों की लेखनी पर
कराया उपहास,खुदको दिनकर बताकर उसने!

सुना है स्वयं को


कहीं से ईंट कहीं से,रोड़ा भिडाकर उसने
चोरी की अनेकों,कविता बनाकर उसने
पढ़कर रचनाएँ औरों की ही जीवनभर
सुना है स्वयं को,दिनकर बता दिया उसने!

शुक्रवार, 23 मार्च 2018

मुख में गंगा हो

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चाहता हूँ मैं जीवन देशहित में काम आए
खुले ये लब जब भी देश का ही नाम आए
यही ख्वाहिश है कि कफ़न मेरा तिरंगा हो
आखिरी शब्द हो जय हिंद,मुख में गंगा हो!
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बुधवार, 7 मार्च 2018

है किसान अस्तव्यस्त

है किसान अस्तव्यस्त,व्यवस्था से बड़े त्रस्त
अँखियों में आँसू लिए,पूछते सवाल है!

हाड़तोड़ श्रम कर,अन्न को उगाने वाले
क्यों विवश बेचने को,कौड़ियों में माल है!

तकादे को बार बार,द्वार आता साहूकार
कैसे वें चुकाएँ कर्ज,सोंचके बेहाल है!

मौत ही है बेहतर,जिल्लत के जीवन से
सोंचकर झूल फाँसी,चुन रहे काल है!

सुनिल शर्मा नील
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284
सर्वाधिकार सुरक्षित