मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

माटी -घनाक्षरी

माटी ही है धर्म मेरा,माटी ही है कर्म मेरा
माटी का ही यशगान,हरक्षण गाऊँगा!
माटी मेरी पहचान,माटी मेरा स्वाभिमान
माटी आनबानशान,सबको बताऊंगा!
भगत-शेखर-शिवा,बोस,राणा,हमीद सा
मान इसे चंदन मैं,माथ पे लगाऊंगा!
इसके रक्षार्थ गर,सर भी कटाना पड़े
हँसते हुए मैं शीश,माटी को चढ़ाऊँगा!

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

दुःखों को छलते चलें हम

मुस्कुराहट से अपने दुःखों को छलते चलें हम !
काँटो के बीच भी फूलों सा खिलते चलें हम !
मुश्किलें लाख आए पर खुद पे विश्वास  कायम रहे,
मिटेगा अंधेरा गर दीपक सा जलते चलें हम !!

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

दुःखों को छलते चले हम

मुस्कुराहट से अपनी दुःखों को छलते चलें हम !
काँटो के बीच में भी फूलों सा पलते चलें हम !
मुश्किलें लाख आए बस खुद पे विश्वास छूटने न पाए,
मिटेगा अंधेरा गर दीपक सा जलते चलें हम !!

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

कब किसको मजबूर किया

बल पर तलवारों के हमने कब किसको मजबूर किया !
गले लगाया सबको हमने कब किसको खुद से दूर किया !
बात आन पर आ जाए तो हम पोरस बन जाते है ,
वक़्त पड़ा तो पल में ही हमने,दंभ सिकंदरों का चूर किया !!

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

मीत

हो जिसपे विश्वास वह,बन जाता है मीत
बंधन है यह नेह का,माँगे केवल प्रीत!

पीर पराई

पीर पराई देखकर, बहता न अब नीर
मानवता है मर रही,
बात बड़ी गंभीर

शनिवार, 27 जनवरी 2018

बेटी

जीवन में सदा सबसे खास रहोगे बेटा
पूरी न होगी जो वह आस रहोगे बेटा
कौन कहता है दूर चली गई तुम मुझसे
पास थे,पास हो,पास रहोगे बेटा!
वह बुलबुल थी मेरे आँगन की,जो
प्राणों से भी प्यारी थी
उसकी अल्हड़ मुस्कान मुझे,दुनिया में सबसे न्यारी थी
मुझसे बढ़कर भी प्रेम उसे,वह ईश्वर शायद करता था
जो छोड़ मुझे वह चली गई,जो खुशियाँ
मेरी सारी थी!