बुधवार, 18 अक्तूबर 2017

चलो अब की दीवाली में

चलो अधरों पे हम अपने,यह पावन गीत सजाते है
गिरा नफरत की दीवारें,"प्यार की रीत" चलाते है
जलाकर नेह का दीपक,मिटाके मन के अंधियारे
चलो अब की दीवाली में,शत्रु को मीत बनाते है!


मंगलवार, 17 अक्तूबर 2017

किसी के घर अंधेरा है,,,,


किसी को है मयस्सर सब,किसी के भाग्य जाला है
जमाने में भला किसने,अजब ये रीत डाला है
अमीरी औ गरीबी की,भला क्यों है यहाँ खाई
किसी के घर अंधेरा है,किसी के घर उजाला है!

सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

वो जिस थाली में,,,

दया के मामले में भी,मजहबी भेद करता है
कभी पंडित के आँसू पे,नही यह खेद करता है
जिन्हें खतरा कहा दुनिया ने,उनको भाई कहता है
वो जिस थाली में खाता है,उसी में छेद करता है!

जलाकर दीप देहरी पर


हुई गल्ती थी क्या मुझसे,समीक्षा कर रहा हूँ मैं
स्वयं के आचरण की अब,परीक्षा कर रहा हूँ मैं
ढल रहा सूर्य जीवन का,चले आओ न तड़पाओ
जलाकर दीप देहरी पर,प्रतीक्षा कर रहा हूँ मैं!

रविवार, 15 अक्तूबर 2017

कुंदन कर लिया

खुद को कुंदन कर लिया,,,,,,
***********************************
जिसने भी संकटों से,गठबंधन है कर लिया
जीवन उसने अपना,चंदन है कर लिया
भस्म हो गया वह,जो तपिश सह नही पाया
जिसने सहा इसे,खुद को कुंदन है कर लिया!
**********************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ. ग.)
7828927284
9755554470

कुंदन

खुद को कुंदन कर लिया,,,,,,
***********************************
जिसने भी संकटों से,गठबंधन है कर लिया
जीवन उसने अपना,चंदन है कर लिया
भस्म हो गया वह,जो तपिश सह नही पाया
जिसने सहा उसने खुद को, कुंदन है कर लिया!
**********************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ. ग.)
7828927284
9755554470

शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

नदी कोई भी हो जाकर समंदर,,,,,


कली यह प्यार की दिल में,मुकद्दर से ही खिलती है
हमें एक सीख जीवन में,कलंदर से ये मिलती है
जो होता भाग्य में अपने,वो चलकर पास आता है
नदी कोई भी हो जाकर,समंदर से ही मिलती है!